ads


Tally Erp9 Laern Debtor Creaditor 2021 Tutorial in Hindi

 Tally Erp9 Learn Debtor-Creditor 2021 Tutorial in Hindi


Tally Erp9 Laern Debtor Creaditor 2021 Tutorial in Hindi




Debtor (देनदार)

जिन व्यक्तियों अथवा संस्थाओं को व्यापारी माल विक्रय करता है वह व्यक्ति या संस्था है उस व्यापारी के डेविड कहलाता है अर्थात व्यापारी जिस व्यक्ति या संस्था को उधार माल देता है उसे रेडी या देनदार डेबिटर कहते हैं इस व्यक्ति को भविष्य में एक निश्चित दिन या निश्चित अवधि के बाद उस पैसे को चुकाना होता है



Creaditor (लेनदार)

यह वह संस्था होती है जो किसी अन्य व्यक्ति या संस्था को माल या सेवाएं उधार देती है या रुपए उधार देती है तो उसे ऋण दाता या लेनदार कहते हैं अतः इस प्रकार संक्षेप में उधार माल बेचने वाला क्रेडिटर कहलाता है और इस व्यक्ति को भविष्य में इस माल की धनराशि प्राप्त होती है



Fixed Assets (अचल स्थाई संपत्ति)

वह बस में जो व्यापार को चलाने के लिए अस्थाई रूप से खरीदी जाती है किंतु उन्हें बेचने के लिए नहीं खरीदा जाता है और उनका उपयोग बार-बार कार्य में किया जाता है वह वस्तुएं अचल संपत्ति या फिक्स असेट कहलाता है 


यह संपत्ति व्यापार की आय को बढ़ाने में सहायक होती है जैसे भवन, फर्नीचर मशीनें, मोटर गाड़ी, आदि अस्थाई संपत्तियां है



Current Assets (चल स्थाई संपत्ति)

 यह हुआ संपत्तियां होती है जो अस्थाई रूप से व्यापार में नहीं रहती है जैसे बैंक में जमा किया गया धन माल का स्टॉक आदि अस्थाई संपतिया है जिसे आसानी पूर्वक संपत्ति में बदला जा सकता है



 Assets (संपत्ति)

 व्यापार में समस्त वस्तुएं जो व्यापार के संचालन में सहायक होती है उन्हें संपतिया असेट्स कहते हैं



Expences (व्यय)

व्यापार में माल के उत्पादन और उसे बेचने में जो खर्च होता है वह  व्यय कहलाता है यह निम्नलिखित दो प्रकार में होता है



1.  Direct Expences (प्रत्यक्ष  व्यय )

 हुए खर्च जिन्हें व्यापारी माल खरीदते वक्त करता है या माल के निर्माण में करता है यदि कच्चा माल या पक्का माल खरीद खरीदने में लगने वाला भाड़ा और उसे गोदाम में ले जाने का किराया भी इस प्रत्यय के अंतर्गत शामिल किया जाता है अतः इस प्रकार उत्पादन की दशा में कच्चे माल की खरीद से लेकर उसे विक्रय योग्य स्थिति तक लाने में कितना खर्च होता है वह प्रत्यक्ष या डायरेक्ट एक्सपेंस कहलाता  जाएगा



डायरेक्ट एक्सपेंस वस्तु की लागत का एक हिस्सा होता है गाड़ी भाड़ा मजदूरी फैक्ट्री के बिजली का बिल ईंधन के रूप में प्रयोग किया जाने वाला डीजल पेट्रोल या अन्य उत्पादन से संबंधित खर्च डायरेक्ट पेंसिल के अंतर्गत आते हैं





2. InDirect Expences (अप्रत्यक्ष व्यय)

इनडायरेक्ट एक्सपेंसेस वे होते हैं जिसका संबंध किसी वस्तु के खरीद या उसके निर्माण से ना होकर वस्तु की बिक्री या उसके कार्यालय से संबंधित व्यय होता है ऐसे इस पेंसिल को इनडायरेक्ट एक्सपेंस इज कहते हैं



इस इस प्रिंसेस का प्रभाव विक्रय किए जाने वाले माल की लागत पर विक्रय नहीं होता है यह एक्सपेंसेस व्यापार के लाभ को घटा देते हैं इसी के अंतर्गत आने वाले इस पेंसिल जैसे विज्ञापन विक्रय पर गाड़ी भाड़ा इस्माल रिप्रेजेंटेटिव को दिया जाने वाला वेतन तथा उन्हें दिया जाने वाला कमीशन एवं कार्यालय के कर्मचारियों को दिया जाने वाला वेतन ग्राहकों को दी जाने वाली छूट  पूंजी  या रेड पर किया गया ब्याज इत्यादि
इनडायरेक्ट एक्सपेंस एजे की श्रेणी में आते हैं




 Debenew (राजस्व)

 जब माल्या सर्विस को मार्केट में सेल किया जाता है उससे जो प्राप्ति होती है वह राजस्व कहलाता है 




 Income (आय)

 व्यापार में माल्या सर्विस को बाजार में बेचने पर जो राजस्व प्राप्त होती है उसमें से इस मैसेज को घटाकर जो राशि बजती है वही इनकम कहलाती है इनकम निम्नलिखित दो प्रकार में होती है




1. Direct Income (प्रत्यक्ष आय)

 डायरेक्ट इनकम हुआ इनकम होती है जो हमें अपने मुख्य व्यवसाय से प्राप्त होती है जैसे यदि मान लीजिए कि कोई बिस्कुट बनाने वाली कंपनी है तो उसको बनाकर बेचने से जो  इनकम होगी वह इनकम डायरेक्ट इनकम कह लाएगी




2. InDirect Income(अप्रत्यक्ष आय)

 यह वह इनकम होती है जो मुख्य व्यवसाय के अतिरिक्त होती है जैसे मुख्य व्यवसाय में आने वाले सामान की पैकिंग के लिए प्रयोग की गई बोरिया गत्ता करके सेल करने से जो आए होगी वह इनडायरेक्ट इनकम के अंतर्गत आएगी




Discount (छूट / बट्टा)

 व्यापारी के द्वारा अपने ग्राहकों को दी जाने वाली रियायत छूट या बट्टा कहते हैं यह डिस्काउंट भी निम्नलिखित दो प्रकार में प्राप्त होता है




1 Trade Discount (व्यापारिक बट्टा )

 यह छूट होता है जो व्यापारी द्वारा ग्राहकों को अधिक माल खरीदने के लिए प्रेरित करने के लिए दिया जाता है अतः इस प्रकार जब व्यापारी माल  बेचते समय अपने ग्राहक को माल की कीमत में कुछ कमी करके या बिल की राशि में कमी करता है तो यह व्यापारी के चुटिया रेट डिस्काउंट कहलाता है 





2. Cash Discount (नकद बट्टा)

 यह हुआ डिस्काउंट होता है जो व्यापारी के नियमानुसार प्रत्येक ग्राहक को एक निश्चित अवधि के भीतर राशि के भुगतान करने पर या नगद खरीद करने पर जो छूट व्यापारी द्वारा ग्राहक को दी जाती है उसे कैश डिस्काउंट कहते हैं





 Vaucher (प्रमाणक)

 व्यापार संबंधित सभी व्यवहारों वाले दिन के प्रभाव के लिए जो डिस्काउंट दिए या लिए जाते हैं उसे बाउचर कहते हैं 






 Account (खाता)

किसी व्यक्ति विशेष वस्तु संपत्ति लाभ या हानि या व्यय आदि से संबंधित  संक्षिप्त रिकॉर्ड हिसाब किताब की पुस्तकों में जिस शीर्षक टाइटल में लिखा गया होता है वह टाइटल ही उसका अकाउंट खाता होता है यह डेट के अनुसार क्रम से लिखा गया होता है





Type of Account (खाता के प्रकार )

 किसी भी व्यापार में लेखांकन के लिए हम निम्नलिखित तीन प्रकार के खाता का प्रयोग करते हैं




Personal Account (पर्सनल अकाउंट  व्यक्तिगत खाता)
Real Account (रियल अकाउंट  वास्तविक खाता)
Nominal Account (नॉमिनल अकाउंट  नाम मात्र खाता)    



                                     Tally ERP9 Download Now



इन तीन प्रकार के खातों का प्रयोग करके हम किसी भी व्यवसाय का लेखांकन करते हैं किंतु इन खातों में लेन देन को दर्शाने के लिए अलग
अलग तीन नियम का प्रयोग करते हैं जिसे काउंटिंग की भाषा में गोल्डन रूल्स आफ अकाउंटिंग कहा जाता है जो निम्नलिखित है

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ